आरम्भ है प्रचंड

आरम्भ है प्रचंड, बोले मस्तकों के झुंड, आज ज़ंग की घडी की तुम गुहार दो,
आरम्भ है प्रचंड, बोले मस्तकों के झुंड, आज ज़ंग की घडी की तुम गुहार दो,
आन बान शान, याकि जान का हो दान, आज एक धनुष के बाण पे उतार दो!
आरम्भ है प्रचंड, बोले मस्तकों के झुंड, आज ज़ंग की घडी की तुम गुहार दो,

आन बान शान, याकि जान का हो दान, आज एक धनुष के बाण पे उतार दो!
आरम्भ है प्रचंड……..
मन करे सो प्राण दे, जो मन करे सो प्राण ले, वही तो एक सर्वशक्तिमान है, -2

कृष्ण की पुकार है, ये भागवत का सार है कि युद्ध ही तो वीर का प्रमाण है,

 कौरवों की भीड़ हो या पांडवों का नीड़ हो जो लड़ सका है वो ही तो महान है!

जीत की हवस नहीं, किसी पे कोई वश नहीं, क्या ज़िन्दगी है, ठोकरों पे वार दो,

मौत अंत है नहीं, तो मौत से भी क्यों डरें, ये जाके आसमान में दहाड़ दो!
आरम्भ है प्रचंड, बोले मस्तकों के झुंड, आज ज़ंग की घडी की तुम गुहार दो,

आन बान शान, याकि जान का हो दान, आज एक धनुष के बाण पे उतार दो!

वो दया का भाव, याकि शौर्य का चुनाव, याकि हार का ये घाव तुम ये सोच लो, -2

 याकि पूरे भाल पे जला रहे विजय का लाल, लाल यह गुलाल तुम ये सोच लो,

रंग केसरी हो या, मृदंग केसरी हो याकि केसरी हो ताल तुम ये सोच लो!

जिस कवि की कल्पना में ज़िन्दगी हो प्रेम गीत, उस कवि को आज तुम नकार दो,

भीगती मसों में आज, फूलती रगों में आज, आग की लपट का तुम बघार दो!

आरम्भ है प्रचंड, बोले मस्तकों के झुंड, आज ज़ंग की घडी की तुम गुहार दो,
आन बान शान, याकि जान का हो दान, आज एक धनुष के बाण पे उतार दो!
आरम्भ है प्रचंड…

आरम्भ है प्रचंड…

आरम्भ है प्रचंड..

हवा का झोंका

दिग्विजय सिंह ने ट्वीट किया “हवा का मामूली झोंका कभी आंधी नही बनेगा,चरखा चला लेने से मोदी गांधी नही बनेगा..”

किसी ने प्रत्युत्तर में कहा :-

“दिया बुझाने के लिए आंधी नही, मामूली हवा का झोंका ही काफी है…

काँग्रेस मुक्त भारत के लिए मोदी नही, राहुल गांधी ही काफी है..!!”

उत्तर प्रदेश का चुनाव 

तूने ऊँगली उठायी तो …….हंगामा हो गया ।


शुभ प्रभात मित्रों, वंदे मातरम !

रोज ८ बजे उठता था। आज नींद ही नहीं आयी 

लगता है आप सभी राष्ट्रवादी मित्रों ने इतनी मेहनत की है, 

यू पी के राष्ट्रवादियों ने ऊँगली उठाई है (EVM का बटन दबाया है, फेसबुक पर माहौल बनाया है) ,

कि यू पी में बीजेपी की सरकार बनना तय है। 

इसीलिए मैं निश्चिन्त लंबी तान के गहरी नींद नहीं सो पाया 

     जिस प्रकार सीमाओं पर हमारे सैनिक 24 घण्टे सतर्क, सशस्त्र हो सीमाओं की रक्षा करते रहते है, अपनी आँखें खुली रखते है

उसी प्रकार आप सभी राष्ट्रवादी मित्र सोशल मीडिया में जागते रहने और जगाते रहने के इस पावन कर्तव्य को निभा रहे हैं। 

तो भला हम जैसे युवा निश्चिन्त होकर कैसे सकते हैं।राष्ट्रवादी मित्रों के जज्बे को शत शत नमन।

तूने ऊँगली उठाई तो ……

हंगामा हो गया ।

वंदे मातरम।
उत्तर प्रदेश में कमल खिलेगा 

प्यार का बदलता स्वरूप

प्यार शब्द ही काफ़ी है । प्यार को परिभाषित करना बहुत ही जटिल है । पहले के समय में जो प्यार का रूप था अब वैसा कुछ नहीं है ।

३ साल पहले जब मैं दिल्ली आया था मेरे एक दोस्त के साथ ऐसा वाक़या हुआ जो याद करके आज भी मैं हसता हु और शर्म भी आती है

बात कुछ ऐसी थी दोस्त के पिताजी दिल्ली के सेंट्रल पार्क में लगे तिरंगे को देखकर देशभक्ति की भावना से पार्क में जाने की इच्छा व्यक्त किए अब दोस्त मना भी नहीं कर सकता था 🤣🤣पापा के साथ क़दम पार्क में बढ़े और बेचारे का दिल सहना ja rha था क्यूँकि हम पहले भी प्रेमी जोड़ों की हरकतों को देख चुके थे । उस दिन पिताजी जब वापस घर आए तो शर्म के मारे खुलकर बोल नहि पाए बस इतना बोले की बेटा 

क्या हो गया है इस देश के युवाओं को 

“प्यार करना है करिए लेकिन थोड़ा शर्म करिए ” ऐसी हरकतें ना करिए 

प्यार की इज़्ज़त कीजिए । 


गांधी परिवार के बुरे दिन 

जो गांधी परिवार दशकों से प्रधानमंत्री के दावेदार हूवा करते थे , 

आज मोदी जी की दहशत ही है ,की मुख्यमंत्री के लिए भी गंभीरता से ये गठबंधन करना पड़ रहा है । 

🤣🤣🤣

ज़िंदगी और सिगरेट 

ज़िंदगी और सिगरेट 

हाँ मैं झूठ बोलता हूं ,
जब फ़ोन पर तुम्हारी आवाज़ सुन कर मै एक गहरी सांस भरता हूँ और तुमसे कहता हूँ की हाँ,सब ठीक है ।

 मै तुमसे सच बोलना चाहता हूँ ,सब कुछ सच

जब सिगरेट को मुह में दबा कर मै तुमसे हर वो बात कह देना चाहता हूं जो मुझे परेशान करती है , तभी अचानक उसी पल मै सोचता हूँ की 

 क्या शिकायत करूँ तुमसे इस ज़िन्दगी की, जब उस मालिक से ही मैंने कुछ शिकायत न की इस अधूरी ज़िन्दगी के लिए।

 बेबसी को सिगरेट के हर कश में जला कर मै हर साँस के साथ उसे पी जाता हूँ, 

इस जहाँ से परेशान मै उस जहाँ में चला जाता हूँ, जहाँ मै सिर्फ तुम्हारे साथ होने की सोचता हूँ ,

सोचते सोचते  बस फिर सुबह होने के साथ मेरे सपने हमेशा की ही  तरह अधूरे रह जाते हैं।

सुबह  ज़रूर नयी होती है, पर बाकि सब पुराना, वही अधूरी ज़िन्दगी, वही तुम्हारी नामौजूदगी और वही एक ओर सिगरेट का धुआं, 

और दूसरी ओर उस धुंए से अपने कलेजे के अंदर की बेबसीे को सेंकता हुआ मै !!

बेबश ज़िंदगी 

शिवरात्रि की शुभकामनायें

शिवरात्रि की शुभकामनायें

सौराष्ट्रे सोमनाथंच श्री शैले मल्लिकार्जुनम् ।उज्जयिन्यां महाकालमोंकारममलेश्वरम् ॥
केदारे हिगवत्पृष्ठे डाकिन्यां भीमशंकरम् ।

वाराणस्यांच विश्वेशं त्र्यम्बंक गौतमी तटे ॥
वैद्यनाथं चिताभूमौ नागेशं दारुकावने ।

सेतुबन्धे च रामेशं घृष्णेशंच शिवालये ॥
एतानि ज्योतिर्लिंगानि प्रातरुत्थाय य: पठेत् ।

जन्मान्तर कृत पापं स्मरणेन विनश्यति ॥

भोले भक्त राघवेंद्र रघुवंशी का आप सभी को सादर प्रणाम के साथ 

शिवरात्रि की ढेरों शुभकामनायें।

भोले का आशीर्वाद , सदैव आपके साथ | 

राघवेंद्र रघुवंशी , दिल्ली विश्वविद्यालय