हमारे पिता ने

हमारे मुँह पर हमारी कभी तारीफ ना की हो,कभी हमे पुरस्कार  ना दिया हो,कभी गले ना लगाया हो.. लेकिन यकीन मानिए हमारी 1 इंच की कामयाबी के लिए 1 किलोमीटर चलने को राजी रहता है वो शक्श है  पिता ,पिता को पता होता है कि ज्यादा अनुशासन लगा के वो अपने बच्चे की चिढ़ का पात्र बन रहा है लेकिन बच्चे के भविष्य की सुरक्षा के आगे ये कीमत बेमानी लगती है,पिता वो इंसान होता है जिसपे कवितायें नहीं लिखीं जातीं,वो आंसू नहीं बहाता, वो हमेशा परिवार के लिए संघर्ष करता रहता है .. वो बस रास्ते में खड़े, विशालकाय पीपल की तरह चुपचाप बस अपनी जिम्मेदारियों का वहन करता है,पिता वह  होता है जो 40 की उमर में ही नये कपड़े,नया फोन,नये जूते, महंगी घड़ी के लिए ये कहके मना कर देता है कि “अब ये सब की मेरी उमर नहीं रही” और वो मन ही मन खुश होता है, कि बच्चों के लिए कुछ पैसे बच गये।

अपनी इच्छाओ को त्यागकर परिश्रम करके जिस बच्चे को वह पढ़ा लिखकर बड़ा करता है वही पुत्र की शादी होने के बाद पिता को घर से निकाल देता है,जिसे वह अपने बुढ़ापे का सहारा समझ बैठे थे वो पुत्र उन्हें अनाथाश्रम में छोड़कर अलग रहने लगता है। क्या इसी दिन को देखने के लिए पिता ने अपने पुत्र की परवरिश करता है, 

ये मुझे सोचने को मजबूर करता है ,की भारतीय संस्कृति ये तो नहीं थी, माता पिता से बड़ा कोई भगवान नही है इस बात को मानिये, उनके चरणों मे चारो धाम स्थित है।।


आज  Happy Father’s Day मना रहे है, 

हमारी संस्कृति हमें प्रतिदिन प्यार कराना सिखाती है,इसलिए हम फादर्स डे की इज़्ज़त करते है, लेकिन प्यार भी हर रोज करते है। 

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3 thoughts on “पिता की दशा

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